आपका जाना-मधु प्रिया

विजय सर, आपका जाना मानो, हम सब को‌ व्यथित कर जाना। कर्म से ही पहचान बनती है, कर्म से ही आपको हमने जाना। एक दिव्य पुरुष की आत्मा, एक स्नेहिल…