बेटियांँ- बाला छंद गीत वर्णिक राम किशोर पाठक
बेटियों को पड़ेगा बचाना।
भेड़ियों से भरा है जमाना।।
सृष्टि को जो चलाती रही है।
प्यार सारा लुटाती रही है।।
रूप माँ की धरी भी वही है।
पालती पोषती जो रही है।।
है छला भी उसे भोग जाना।
बेटियों को पड़ेगा बचाना।।०१।।
पूजते लोग क्यों नारियों को।
शर्म आती न व्यापारियों को।।
लाडली माँ पिता की दुलारी।
लूटती जा रही दर्द भारी।।
शस्त्र ले लो पड़ेगा उठाना।
बेटियों को पड़ेगा बचाना।।०२।।
वासना अंध जो हैं पुकारो।
मौत का घाट जाओ उतारो।।
छू रहे बेटियाँ भी सितारे।
माँ पिता प्राण के है सहारे।।
ठान लो पापियों को मिटाना।
बेटियों को पड़ेगा बचाना।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८
0 Likes

