गुरु पद वंदन- सारवती छंद वर्णिक – राम किशोर पाठक
२११-२११-२११-२
वेद पुराण सभी कहते।
ज्ञान प्रकाश वही गहते।।
जो गुरु वंदन है करते।
शीश सदा पग में धरते।।०१
पुण्य प्रसून सदा खिलता।
मार्ग निदान उसे मिलता।।
ईश झुकें पग में जिसके।
चंदन है रज में जिसके।।०२।।
दूर करे असमंजस जो।
नूर भरे उर अंतर जो।।
पार करे गुरु ही भव को।
तेज अतुल्य ढके रव को।।०३।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

