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एक निर्दयी बंधन -सुमन सौरभ

SUMAN SOURABH

SUMAN SOURABH

एक निर्दयी बंधन -सुमन सौरभ

बाल विवाह है एक अबूझ पहेली

जब होने चाहिए बहुत सी सहेली

तब भर दी जाती हैं चूड़ियों से हथेली

छोटी सी गुड़िया, छोटी सी जान,

क्यों लाते हो जीवन में इतना बड़ा तूफान।

खेलने की उम्र, पढ़ने का समय,

क्यों छीना जाता है उसका निश्चय?

न करो, न करो, ये बाल विवाह,

बच्ची के जीवन में लाओ उत्साह।

गुड्डे-गुड़ियों का समय है अनमोल,

उसे क्यों देते हो दुख का झोल।

किताबों को थामे, स्कूल वो जाए,

अच्छे भविष्य का सपना सजाए।

न करो, न करो, ये बाल गुनाह,

बच्ची का जीवन ना करो तबाह।

जीवन उसका, अधिकार उसका ,

शिक्षा हो जीवन का उद्धार जिसका।

खुश रहने का हक है उसको,

प्यार से जीने का हक है उसको,

उसे दो मौका, सपने वो बुने

बाद चल के अपना साथी खुद ही चुने।

उन्हें चाहिए शिक्षा और प्यार,

उन्हें  चाहिए खुशियाँ बेशुमार।

बंद करो, बंद करो, ये बाल विवाह!

दो हर बच्ची को जीने का नया राह!

 

सुमन सौरभ (शिक्षिका)

जगतारिणी उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय खम्हार,

विभूतिपुर, समस्तीपुर, बिहार

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