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कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

Ram Kishore Pathak

कोहरा – उल्लाला छंद गीत – राम किशोर पाठक

सभी लोग हैं काँपते, सर्दी सबको खल रही।
फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।।

मुश्किल होता देखना, आस-पास में भी यहाँ।
वाहन भी टकरा रहें, बढ़ जाती है गति जहाँ।।
रेंग-रेंगकर गाड़ियाँ, देखो कैसे चल रही।
फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।।०१।।

सर्द हवा के तीर से, घायल होते लोग हैं।
गर्म-गर्म कपड़े सभी, करते सब उपयोग हैं।।
सबकी आशा में अभी, गर्म पेय प्रति पल रही।
फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।।०२।।

बाहर जाना छोड़िए, शीतल सर्द समीर में।
छुपकर रहना है भला, लगे न ठंड शरीर में।।
जो चपेट में आ गए, उनको हर-पल सल रही।
फैल गया है कोहरा, दृष्टि सभी की छल रही।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

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