मैं फलक – तू चाँद मेरा – पुनम कुमारी
मैं फलक हूँ, तू चाँद मेरा,
तुझसे ही रोशन संसार मेरा।
तेरी चाँदनी से सजती रातें,
तुझसे ही जुड़ी हैं दिल की बातें।
तू दूर सही, पर पास लगे,
तेरा हर एहसास खास लगे।
तेरी हँसी में सुबह मेरी,
तेरी खुशी में शाम मेरी।
मैं आसमान बनकर रह जाऊँ,
तुझको अपनी पलकों पर सजाऊँ।
तू चमके बनकर चाँद सलोना,
तेरे बिन क्या मेरा, क्या होना?
जब बादल तुझको ढक लेंगे,
जब अँधेरे तुझको घेरेंगे,
मैं बनकर फलक तेरा साथ निभाऊँगी,
हर मुश्किल में तुझे राह दिखाऊँगी।
न तुझसे कोई शिकवा होगा,
न दूरियों का डर होगा।
तू चाँद मेरा, मैं फलक तेरी,
बस इतनी-सी दुनिया हो मेरी।
तेरी रोशनी से मेरा वजूद है,
तेरे होने से दिल में सुकून है।
जन्मों-जन्मों का हो साथ हमारा,
मैं फलक रहूँ और तू चाँद मेरा।
तेरी रोशनी से महके जीवन हमारा,
खुशियों से सजे हर पल प्यारा।
दुनियां चाहे बदले नज़ारा,
मैं फलक हूँ… और तू चाँद मेरा।
रचनाकार का परिचय
रचनाकार: पुनम कुमारी
उच्च माध्यमिक विद्यालय करजा
प्रखंड: शाहपुर,
जिला: भोजपुर

