Site icon पद्यपंकज

मुक्तक (आधार छंद-स्रग्विणी) – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

RAMPAL SINGH ANJAN

RAMPAL SINGH ANJAN


मुक्तक (आधार छंद-स्रग्विणी) – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’


आज दीपावली है मजा लीजिए।

दीप थोड़े जले हैं सजा दीजिए।

पास मेरे घरों के बसे लोग जो…,

झोपड़ी में उन्हें भी नया कीजिए।।


मातु लक्ष्मी सदा जा रही हैं वहाँ

दीप घी के जले हैं सुने हैं जहाँ

है गरीबी किसी को सुहाती नहीं…,

एकदा रोशनी को दिखाएँ तहाँ।


रोशनी चाहिए तो घरों को सभी,

दीनता साथ लक्ष्मी नहीं है कभी।

है खुशी से जिए जो न ज्यादा लिए…,

हे प्रभो!बास लो रोशनी में तभी

 

✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version