अनंग शेखर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 


RAMPAL SINGH ANJAN

अनंग शेखर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ 

अशोक हैं सदैव ही

न जिंदगी बड़ी मिली न पंख हैं बड़े-बड़े,
थके नहीं उड़ान से कहाँ विहंग जा रहे।

डरा स्वभाव आदमी दिगंत के निशान से,
वहीं उमंग से चले अपार गीत गा रहे।।

निराशता कभी नहीं अशोक हैं सदैव ही,
डरे नहीं झुके नहीं विशाल आसमान से।

अहिंस हिंस बीच में मनुष्य में उदारता,
लगा रहें दरख्त को हटो नहीं मकान से।।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
सेवानिवृत शिक्षक
मध्य विद्यालय दरबे भदौर
पंडारक पटना

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