मुक्तक (आधार छंद-स्रग्विणी) – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आज दीपावली है मजा लीजिए। दीप थोड़े जले हैं सजा दीजिए। पास[...]
मुक्तक (आधार छंद-स्रग्विणी) – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ आज दीपावली है मजा लीजिए। दीप थोड़े जले हैं सजा दीजिए। पास[...]