नाम कहो या संज्ञा – धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
- संज्ञा (Noun)
परिभाषा काव्य:
जो बतलाए नाम को, वस्तु, जीव या स्थान।
भाव-दशा जो भी कहे, “संज्ञा” उसकी जान॥
उदाहरण काव्य:
राम अयोध्या के नृपति, करुणा जिनके पास।
दिल्ली नगरी है बड़ी, पुस्तक रचे इतिहास॥
(यहाँ राम (नाम/जीव), करुणा (भाव), दिल्ली (स्थान) और पुस्तक (वस्तु) संज्ञा हैं।) - सर्वनाम (Pronoun)
परिभाषा काव्य:
संज्ञा के बदले जो आए, भाषा को सुकुमार बनाए।
पुनरुक्ति का दोष मिटाकर, “सर्वनाम” वह पद कहलाए॥
उदाहरण काव्य:
मैं गाता हूँ, तुम सुनते हो, वह बैठा है दूर कहीं।
हम सब मिलकर हाथ बढ़ाएँ, कोई भी मजबूर नहीं॥
(यहाँ मैं, तुम, वह, हम, कोई सर्वनाम हैं।) - विशेषण (Adjective)
परिभाषा काव्य:
संज्ञा और सर्वनाम की, जो बतलाए बात।
गुण, दोष या माप-तोल, “विशेषण” की सौगात॥
उदाहरण काव्य:
काला घोड़ा दौड़ रहा है, सुन्दर उपवन महक रहा।
चार सिपाही पहरा देते, मीठा कोयल चहक रहा॥
(यहाँ काला, सुन्दर, चार, मीठा विशेषण हैं।) - क्रिया (Verb)
परिभाषा काव्य:
जिससे होना या करना, जाना जाए काम।
समय चक्र को जो लिखे, “क्रिया” उसी का नाम॥
उदाहरण काव्य:
बच्चा रोकर मुस्काता है, पंछी नभ में उड़ता है।
दीपक रात भर जलता है, पथिक राह पर मुड़ता है॥
(यहाँ मुस्काता, उड़ता, जलता, मुड़ता क्रियाएँ हैं।) - क्रिया-विशेषण (Adverb)
परिभाषा काव्य:
क्रिया कैसे, कब, कहाँ, कितनी हुई जनाए।
क्रिया की विशेषता जो दे, “क्रिया-विशेषण” कहलाए॥
उदाहरण काव्य:
कछुआ धीरे-धीरे चलता, सूरज रोज़ निकलता है।
शेर अचानक सामने आया, पानी कम-कम उबलता है॥
(यहाँ धीरे-धीरे (रीति), रोज़ (समय), अचानक (शैली), कम-कम (परिमाण) क्रिया-विशेषण हैं।) - सम्बन्धबोधक (Preposition)
परिभाषा काव्य:
संज्ञा या सर्वनाम का, अन्यों से सम्बन्ध।
जो वाक्य में जोड़ दे, “सम्बन्धबोधक” छन्द॥
उदाहरण काव्य:
घर के आगे पेड़ है, विद्या के बिन सून।
नदिया बहती धार सी, सागर के अनुकूल॥
(यहाँ के आगे, के बिन, के अनुकूल सम्बन्धबोधक अव्यय हैं।) - समुच्चयबोधक (Conjunction)
परिभाषा काव्य:
दो शब्दों या वाक्यों को, जो आपस में जोड़ दे।
सेतु बनकर अर्थ का, नया मोड़ वह मोड़ दे॥
(इसे “समुच्चयबोधक” कहते हैं)
उदाहरण काव्य:
राम और लक्ष्मण चले, वर्षा हुई किन्तु धूप खिली।
पढ़ लो या तुम सो जाओ, मेहनत से ही सफलता मिली॥
(यहाँ और, किन्तु, या समुच्चयबोधक हैं।) - विस्मयादिबोधक (Interjection)
परिभाषा काव्य:
हर्ष, शोक, आश्चर्य, घृणा, मन के भाव अपार।
मुख से सहसा जो गिरे, “विस्मयादि” झंकार॥
उदाहरण काव्य:
अरे! कहाँ तुम चले गए, वाह! क्या दृश्य सुहाना है।
छी! कितनी गन्दगी यहाँ, हाय! दुखों का जमाना है॥
(यहाँ अरे!, वाह!, छी!, हाय! विस्मयादिबोधक शब्द हैं।)
धर्मेंद्र कुमार ठाकुर
प्राथमिक विद्यालय रेही टोला
रानीगंज अररिया
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