Site icon पद्यपंकज

पावस- नील/विशेषक/विश्वगति छंद गीत वर्णिक – राम किशोर पाठक

Ram Kishor Pathak

हिंदी - किशोर छंद

पावस- नील/विशेषक/विश्वगति छंद गीत वर्णिक – राम किशोर पाठक

पावस में जब बूंँद धरा पर है गिरती।
तृप्ति सभी कण व्याकुल को सहसा मिलती।।

आतप चैन चुरा सबको हलकान किया।
सूरज की किरणें जब जीवन हान किया।।
तो जलधार गिरा नभ जीवन है भरती।
पावस में जब बूंँद धरा पर है गिरती।।०१।।

तृप्ति सुधा रस से अवनी तन यौवनता।
मादक गंध भरे मृगवाहन चंचलता।।
वृक्ष लता सरिता सर निर्मलता गहती ।
पावस में जब बूंँद धरा पर है गिरती।।०२।।

चूनर ओढ़ हरीतिम सुंदर सी चलती।
स्वर्ग छटा अति पावन सी अवनी गढ़ती।।
रूप अलौकिक मोहक साज रही धरती।
पावस में जब बूंँद धरा पर है गिरती।।०३।।

गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
सियारामपुर, पालीगंज, पटना, बिहार।
संपर्क- ९८३५२३२९७८

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version