शहादत गीत- महा-शशिवदना छंद – राम किशोर पाठक
जुल्म विरोधी हूँ, सत्य बताता हूँ।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।
शासक मुगलों के, किए अत्याचार थें।
खत्म हुए कितने, सभ्य परिवार थें।।
औरंगजेब की, दुष्कृत गाता हूॅं।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।०१।।
जुल्मों की गाथा, होता अक्सर था।
माह दिसम्बर था, रोता अम्बर था।
बालक वीरों को, शीश नवाता हूँ।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।०२।।
सिंह गोविन्द के, चारों बच्चों की।
राष्ट्र-भक्त जो थें, सीधे- सच्चों की।।
अपनी गीतों से, व्यथा जताता हूॅं।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।०३।।
उन्हें इस्लाम था, मनवाने आया।
सफल न हो पाया, तो वह गुस्साया।।
दर्द बयाँ दिल की, कर कुछ पाता हूॅं।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।०४।।
क्रूर फैसला दे, था वह इठलाया।
साहिबजादों को, जिंदा चुनवाया।।
दफन दीवार में, दृश्य दिखाता हूॅं।
गीत शहादत का, आज सुनाता हूॅं।।०५।।
गीतकार:- राम किशोर पाठक
प्रधान शिक्षक
प्राथमिक विद्यालय कालीगंज उत्तर टोला, बिहटा, पटना, बिहार।
संपर्क – 9835232978

