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स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार

Kartik Kumar

Kartik Kumar

स्वाभिमान, सत्य और सेवा का संकल्प – कार्तिक कुमार

सत्य राह का पथिक हूं

मैं सत्य की राह का पथिक हूँ, झुकना मेरा काम नहीं,
सेवा मेरा धर्म रहा है, पद का कोई नाम नहीं।
योग-साधना जीवन मेरा, जनसेवा पहचान मेरी,
सत्य-संकल्प के दीप से रोशन रही उड़ान मेरी।
आरोपों के तूफानों से मेरा विश्वास नहीं डोलेगा,
सत्य समय की कसौटी पर हर झूठ स्वयं ही खोलेगा।
मैंने अपना जीवन सौंपा, गुरु-समाज की सेवा में,
कभी स्वार्थ को स्थान न दिया, अपने कर्मों की मेवा में।
यदि कोई भूल हुई हो, तो न्यायपूर्ण निर्णय हो,
बिना प्रमाण किसी पर दोष नहीं, सत्य का ही अनुकरण हो।
आँसू भी देखे परिवार के, पीड़ा भी मन में सहलायी,
फिर भी गुरु के चरणों में मैंने श्रद्धा नहीं गंवाई।
एक माह में आरोप-मुक्ति का निर्णय यदि स्वीकार हुआ,
तो मेरा टूटा हुआ विश्वास पुनः सेवा में साकार हुआ।
न पद की चाह, न धन की इच्छा, न यश का अभिमान है,
गुरु-समाज की निष्काम सेवा ही मेरा स्वाभिमान है।
कार्तिक कुमार का संकल्प है—सत्य की विजय कराऊँगा,
अन्याय नहीं, न्याय माँगकर सेवा-पथ पर लौट आऊँगा।
सत्य अडिग है, सत्य अमर है, सत्य कभी न हारता,
समय भले परीक्षा ले ले, सत्य ही सम्मान दिलाता।

लेखक कार्तिक कुमार मध्य विद्यालय कटरमाला गोरौल वैशाली 700431812

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