कबीर दास-पद्यपंकज

कबीर दास

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कबीर दास जी की जयंती पर याद करते हुए… 🙏

 

 

सच से सामना करवाते है।

 

झूठ – अंधविश्वास को आईना दिखाते है।

 

कोई चाकू,बंदूक तलवार नही उठाते है।

 

अपने दोहों की ताकत से हर बात समझाते है।

 

उनके व्यक्तित्व जैसा कोई दूर तक नजर नहीं आते है।

 

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

 

हर मजहब से ऊपर उठकर अच्छा इंसान बनने की बात बतलाते है।

 

ईश्वर को खुद के पास होने का एहसास दिलाते है।

 

जितनी धन संपत्ति है उसमे भूखा न हो कोई का आभास करवाते है।

 

जिनके दोहे से ताड़ खजूर भी बौने नजर आते है।

 

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

 

 

कोई कहता है की कबीर के दोहे अब पुराने है,समझ नही आते है।

 

जो ये सोचते है,उन्हे नही पता वे आधुनिकता के दीवाने हो गए है।

 

एक – एक दोहे आज भी अपनी महता समझाते है।

 

धीरज के साथ थोड़े देर के लिए कबीर को खुद में स्थान जो दे जाते है।

 

दुनिया में बिल्कुल अलग और अदभुत व्यक्तित्व से महान जो बन जाते है।

 

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

 

 

धीरज कुमार

UMS सिलौटा भभुआ

कबीर दास जी की जयंती पर याद करते हुए… 🙏

सच से सामना करवाते है।

झूठ – अंधविश्वास को आईना दिखाते है।

कोई चाकू,बंदूक तलवार नही उठाते है।

अपने दोहों की ताकत से हर बात समझाते है।

उनके व्यक्तित्व जैसा कोई दूर तक नजर नहीं आते है।

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

हर मजहब से ऊपर उठकर अच्छा इंसान बनने की बात बतलाते है।

ईश्वर को खुद के पास होने का एहसास दिलाते है।

जितनी धन संपत्ति है उसमे भूखा न हो कोई का आभास करवाते है।

जिनके दोहे से ताड़ खजूर भी बौने नजर आते है।

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

कोई कहता है की कबीर के दोहे अब पुराने है,समझ नही आते है।

जो ये सोचते है,उन्हे नही पता वे आधुनिकता के दीवाने हो गए है।

एक – एक दोहे आज भी अपनी महता समझाते है।

धीरज के साथ थोड़े देर के लिए कबीर को खुद में स्थान जो दे जाते है।

दुनिया में बिल्कुल अलग और अदभुत व्यक्तित्व से महान जो बन जाते है।

वही इस जग में कबीर कहलाते है।

धीरज कुमार
UMS सिलौटा भभुआ

धीरज कुमार

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