रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी बदरा लुभाए आज, रिमझिम बजे साज, कैसे करे कोई काज तन मन पाए खास। तरंगिणी भर गई, लहरें हिलोर मारी, डोल रही पनसुय्या उर्मी जगायी आस। हलधर…

मनहरण – एस.के.पूनम

जाग रहा जग बंधू, ढूंढ़े मुझे प्रिय संधू, संसार के रखवाले,आए मेरे द्वार हैं। धरे कई रुप सदा, पहचाने यदाकदा, युगों से मोहनी छवि,मुझे तो स्वीकार है। द्वापर में कृष्ण…

सृष्टि देते उपहार – एस.के.पूनम

दरिया में जल मिले, सागर में नदियाँ भी, धरती आकाश मिल सृष्टि देते उपहार। कहीं-कहीं छाँह धूप, चुभते दिलों में शूल, मिटती न तृष्णा कभी मिथक न हो प्रहार। माटी…

मनहरण घनाक्षरी – एस.के.पूनम

रुपहली आभा संग, लिए हुए लाल रंग, उदित है प्रभाकर,प्रवेश उजास का । हर्षित हो वसुंधरा, इठलाते झूमे भौंरा, हरियाली देख आए,मौसम प्रवास का। आए पंछी उड़ कर, तृण लाए…

विशुद्ध हो सटता – एस.के.पूनम

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण (विशुद्ध हो सटता) घर-बार छोड़ कर, करते हैं योग ध्यान, बिछा हुआ भ्रम जाल,काटे नहीं कटता। आदान-प्रदान कर, कुँज मुंज सजाकर, चमत्कार देख कर,गुप्त नाम रटता। लघु…

करती हूँ बंदगी – एस.के.पूनम

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-मनहरण (करती हूँ बंदगी) तरसती है निगाहें, भरती हैं नित्य आहें, भूखे पेट तड़पती,मजबूर जिन्दगी। भाग्य से निवाला मिला, जूठन भी मिला गिला, आहार विनाश कर,फैलाए क्यों गंदगी।…

संसार करे सम्मान – एस.के.पूनम

भूखी प्यासी चल रही, साँवली सलोनी नारी, ठौर न ठिकाना कहीं,आशियाना आसमान। जननी पुकारे कोई, नभ तले मिली सोई, अपना न सुत-पुत,कैसे करे अभिमान। तपी है कंचन काया, करुणा से…

रूपघनाक्षरी – एस.के.पूनम

भोर का आगा़ज कर, शोर करे नभचर, जाग गए नर -नारी,पहुँचे हैं खलिहान । कुदाल है कंधे पर, टोकरी है माथे पर, कीचड़ में सने पैर,काश्तकार पहचान। भूमिपुत्र अन्नदाता, मोहताज…

मनहरण – एस.के.पूनम

क्षितिज पार से आए, क्षितिज पार को जाए, मध्य काल तप्त कर,गोधूलि अस्त रहे। प्रातःकाल मुसकाय, दोपहर झुलसाय, तप कर वसुंधरा,कुंदन बन सहे। तरू डाल सूख कर, पत्ते गिरे रूठ…

मन कहे वाह वाह – एस.के.पूनम

🙏कृष्णाय नमः🙏 विधा:-रूपघनाक्षरी (मन कहे वाह वाह) हरी-भरी घास पर, ओश करे जगमग, प्रकृति की छटा देख,मन कहे वाह-वाह। रवि कहे धरनी से, होना है निडर सखि, धूप-छाँह होते-होते,कटते हैं…