आत्ममंथन – पुरुषोत्तम कुमार
दूसरों की पहचान बताता
तू खुद अपनी पहचान कर
छोड़ अन्य बातों को
अपने भीतर स्वाभिमान भर
पहचान अपने आपको
कहां खो गई है तेरी शक्ति
क्यों पड़ा है तू इस मायाजाल में क्यों है तेरे भीतर यह अंधभक्ति
क्या नहीं है तेरे पास जो
तू किसी के पास है जाता
क्या नहीं है तेरे साथ जो
तू किसी का साथ चाहता
तू मनुज है तो मनुज का कर्म निभा, चल हमेशा सतपथ पर
तू अपना धर्म निभा
हे कर्म राही, तू अकेला ही चल तू तो है है कर्मरथी
जिंदगी को हांकने को खोज नहीं कोई सारथी
तू इतना क्यूं घबराता
समय है बाकी अभी
पहचान अपने आपको
तू हार नहीं सकता कभी
अपनी अंतर्रात्मा की
बात तू हमेशा सुन
भटक जाए जहां जिंदगी
वैसा न तू रास्ता चुन
कर किसी की सहायता
पर किसी से चाहत न कर
कर के किसी कम को
कभी न तू आहें भर
ठोकर से तू क्यों घबराता
ठोकर ने ही तो तुझे
चलना सिखाया
आभार व्यक्त कर उनका
जिन्होंने तुझे ठोकर लगाया।
पुरुषोत्तम कुमार
प्रधान शिक्षक
उर्दू प्राथमिक विद्यालय लोदीपुर गोलघर अंचल पटना, बिहार।

