प्रकृति के प्रागंण में – पुरुषोत्तम कुमार प्रकृति के प्रागंण में अलौकिक आनंद है इस आंगन में, प्रकृति के प्रागंण[...]
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कार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमारकार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमार
कार्तिक अमावस्या – पुरुषोत्तम कुमार आने वाली है, फिर काली अमावस्या रात, पर इस रात की अलग होगी बात। न[...]
तू आना कान्हा – पुरुषोत्तम कुमारतू आना कान्हा – पुरुषोत्तम कुमार
तू आना कान्हा – पुरुषोत्तम कुमार जब जब धरती पर बढ़े अत्याचार तू आना कान्हा लेकर अवतार। साथ में लाना[...]
आत्ममंथन – पुरुषोत्तम कुमारआत्ममंथन – पुरुषोत्तम कुमार
आत्ममंथन – पुरुषोत्तम कुमार दूसरों की पहचान बताता तू खुद अपनी पहचान कर छोड़ अन्य बातों को अपने भीतर स्वाभिमान[...]
