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बंद करो बाल विवाह – संगीता कुमारी

बंद करो बाल विवाह – संगीता कुमारी

 

खूब पढ़ाओ यह देनी एक सलाह,

बंद कर दो अब तो बाल – विवाह।

 

लड़का एवं लड़की होने दो जवान,

ना करना बचपन में जीवन स्वाहा।

 

क्या सही गलत का नहीं पहचान,

अभी है यह कच्चे घड़े के समान।

 

चुनने दो इन्हें अपनी – अपनी राह,

और चुनने दो ये गगन आसमान।

 

शादी एवं सुहाग यह होता क्या है,

बंधन एवं फेरों का मतलब क्या।

 

काजल – बिंदी निर्जल व्रत है क्या,

गुड्डा गुड़िया का यह खेल है क्या।

 

बचपना में लगाओ ना कोई भी विराम,

बच्चा बच्ची समझो दोनों एक समान।

 

पढ़ लिखकर बनाने देना इसको अपनी पहचान,

पकने देना इनको घड़ों के समान।

 

अभी बेडिया पांव में डालो नहीं,

आंगन में चिड़िया सा चहकने दो।

 

फूल बनकर इसे अभी महकने दो,

इस कोमल कली को टूटने नहीं दो।

अभी इसका बचपन टूटने ना दो….!!

 

संगीता कुमारी

मध्य विद्यालय मलमल

प्रखंड – कलुआही

जिला – मधुबनी

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