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जिंदगी – बिंदु अग्रवाल

Bindu Agrwal

Bindu Agrwal

जिंदगी – बिंदु अग्रवाल

बेतहाशा दौड़े हम, तेरे साथ जिंदगी,
मिला न कुछ रह गए, खाली हाथ जिंदगी।

अंतस बना है मेरा, पतझड़ वीरान सा,
फूले बेला, कुसुम, फूले पलाश जिंदगी।

सोचा था शीतल बयार बन, चलूंगी तेरे साथ,

निर्धूम अग्नि कुंड सी, जली है आज जिंदगी।

पग-पग पर दागे तुमने, जख्म हमपे बहुतेरे,
खड़े हैं हम भी तैयार देने, इम्तिहान जिंदगी।

मैंने हर पल तुम्हें, अपना बनाना चाहा,
अब तलक रही तुम मुझसे, अनजान जिंदगी।

रुसवा किया है तुमने, हर कदम पर मुझको,
कभी तो अपनाओगी मुझे, है आस जिंदगी।

उठे हैं तूफान अंदर, घिरे हैं झंझावात कई,
पर मानी नहीं है बिंदु, मैंने हार जिंदगी।

बिंदु अग्रवाल

शिक्षिका
मध्य विद्यालय गलगलिया
किशनगंज बिहार

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