जीवन मे प्रेम का आधार हो , इसमें न छल व्यापार हो । न कालिमा -सी बात हो , न,[...]
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फैसला- अमरनाथ त्रिवेदीफैसला- अमरनाथ त्रिवेदी
छुपे हुए व्योम के पीछे , क्या तुम तारे ढूँढ रहे हो ? या उजास के उजले चादर की ,[...]
प्रेम संदेश – अमरनाथ त्रिवेदीप्रेम संदेश – अमरनाथ त्रिवेदी
प्रेम सदा अपनाओ जग में , प्रेम सदा अपनाओ रे । लेकर कुछ नही जाना वन्दे , प्रेम सदा बरसाओ[...]
इंसानियत-अमरनाथ त्रिवेदीइंसानियत-अमरनाथ त्रिवेदी
वफ़ा की सर्वत्र खुशबू मिले , सरल ह्रदय – सरल मिले । न जहाँ कोई बेगानापन , जहाँ न हो[...]
आह्वान – अमरनाथ त्रिवेदीआह्वान – अमरनाथ त्रिवेदी
मुँह में राम दिल मे छुरी , लेकर न कभी जिया करो । ऐसा न कभी किया करो । ।[...]
नववर्ष- अमरनाथ त्रिवेदीनववर्ष- अमरनाथ त्रिवेदी
मानो पुराने वर्ष का , सूर्यास्त है अब हो रहा । नवोदित नववर्ष यह , सूर्योदय -सा अब भा रहा[...]
कर्म का रहस्य -अमरनाथ त्रिवेदीकर्म का रहस्य -अमरनाथ त्रिवेदी
सम्बल तप -त्याग का , चला रहा संसार को । कर्मपथ निष्कंटक नही, बतला रहा निज सार को । है[...]
प्रकृति का तांडव-अमरनाथ त्रिवेदीप्रकृति का तांडव-अमरनाथ त्रिवेदी
सांसारिक क्लेश अब, नस -नस में चुभने लगी है । सत्प्रयोजनों से नाता , ज्यों छूटने लगी है । हमीं[...]
कर्त्तव्य बोध -अमरनाथ त्रिवेदीकर्त्तव्य बोध -अमरनाथ त्रिवेदी
पुरातन से ओजस्विता लिए , विचरण हम जब – जब करते हैं । सत्य -दृढ़ अनुशीलन पर , तब मार्ग[...]
कर्म -वाणी-अमरनाथ त्रिवेदीकर्म -वाणी-अमरनाथ त्रिवेदी
जिस ओर हम पग धरें , सुकर्म सम्मत नीति से । फिर हार हो सकती नही , चाहे कोई भी[...]
