“शैलपुत्री” का पहला वंदन-धैर्य संकल्प का दीप जलाओ,
अडिग रहो, हिमगिरि सम दृढ़, सच्चे पथ पर कदम बढ़ाओ।
“ब्रह्मचारिणी” का सन्देश- साधना से अपनी राह बनाओ,
धैर्य, संयम, तप की ज्योति से, सत्य पथ पर चलते जाओ।
“चंद्रघंटा माँ” का यह उद्घोष – अन्याय से मत डरना,
वीर बनो, साहस धारण कर, दुष्टों का संहार करना।
“कूष्मांडा माँ” का उपदेश-सृजन का दीप जलाओ,
अंधकार से हटकर, नवजीवन की नई राह बनाओ।
“स्कंदमाता” का नेह संदेश-ममता, करुणा अपनाओ,
प्रेम, वात्सल्य से जीवन को, सुंदरतम सृजन बनाओ।
“कात्यायनी” का पावन ज्ञान-अन्याय को मत सहना,
सत्य मार्ग नित अडिग रहो,धर्म वचन अंतर्मन कहना।
“कालरात्रि” का दिव्य संदेश-अज्ञान का तम हर लो,
सत्य, धर्म और ज्ञान की ज्योति से मन मंदिर भर लो।
“महागौरी” का शुभ संदेश- पवित्रता को अपनाओ,
मन,वचन और कर्म से निर्मल, शुचिता को दिखलाओ।
“सिद्धिदात्री माँ” का आशीष-कर्म को पूजा मानो,
मेहनत, समर्पण, प्रेम से, जीवन को पावन जानो।
“नवदुर्गा” का यह उपदेश, हर जीवन में शक्ति लाए,
माँ की कृपा से हर हृदय में, सत्य, धर्म, प्रेम जगाए।
सुरेश कुमार गौरव
‘प्रधानाध्यापक’
उ. म. वि. रसलपुर, फतुहा, पटना (बिहार)