परिवार की छाँव-प्रियंका प्रिया

परिवार की छाँव

जिस तरह वृक्ष को जड़ जोड़ कर रखता है
उसी तरह परिवार रिश्तों को बेजोड़ रखता है।

जिस तरह धूप में ढूंढ़े फिरे ठाँव,
उसी तरह जरुरी होती है परिवार की छाँव।।

सादगी, संस्कृति, संयम का पाठ पढ़ाए,
परिवार ही जीवन में सही राह दिखाए।।

मुसीबत में डटकर खड़ा होता है,
जिसके पीछे परिवार बड़ा होता है।

परिवार के बिना जीवन अधूरा सा लगता है,
वो परिवार ही है जिसके साथ हर सपना पूरा लगता है।

तरक्की में परिवार के अपने भूल न जाना तुम,
कहीं भी रहो इसके छाँव में आना तुम।।

परिवार ही स्नेहाशीष प्रदान करता है,
सुशील, सहज भाव प्रदान करता है।

परिवार है तो सुखी है जीवन,
खिलता हर कोना घर का आंगन।।

स्वरचित एवं मौलिक
प्रियंका प्रिया
पटना, बिहार

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