गुरु हैं जग के सोपान-अश्मजा प्रियदर्शिनी

गुरु हैं जग के सोपान गुरुवर के सानिध्य में बनते हम महान न रहते नादान, देते आशिष बनाते सुल्तान गुरूवर देते हमें अनुपम सकल ज्ञान हमारी नादानी का करते निदान…

वर्षा रानी-प्रीति कुमारी

वर्षा रानी  वर्षा रानी का आगमन पुलकित हुआ हमारा मन गर्मी से व्याकुल वसुंधरा को, जैसे मिला हो नव जीवन। बाग़-बगीचे हरे हुए  और हरा हुआ सब वन-उपवन पुष्प सारे…

क्षितिज के पार-दिलीप कुमार गुप्ता

   क्षितिज के पार  हिम वेदना को पिघलाने नयनो के अश्रुकोश लुटाने विकल मन को त्राण दिलाने अन्तर्मन छवि पावन बसाने आओ चले क्षितिज के पार । कुत्सित भाव विचार…

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