आज बच्चों में उल्लास, छुट्टी मिली है जो खास, चकचक ताजिया है, भरे जो विश्वास से। हिंदुओं का गाॅंव प्यारा,[...]
रूप घनाक्षरी- एस.के.पूनमरूप घनाक्षरी- एस.के.पूनम
नभ पर छाए मेघ, होने लगी बूंँदा-बाँदी, तृण को पोषण मिले, हरियाली चहुँओर। भर गए नदी-नाले, तृप्त हुए जीव-जन्तु, चातक[...]
रूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रविरूप घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद रवि
कोई यहाँ मौज करे, लाखों लूटा भोज करे, गरीबों की जिंदगी तो, काँटों के समान है। कोई तो दाने-दाने को,[...]
हर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमारहर वर्ष पेड़ लगाना है- रविन्द्र कुमार
प्रकृति के हैं रूप अनेक पेड़ है जिनमें से एक। ये जहाँ भी होता है, जीवन खुशियों से भर देता[...]
राष्ट्र निर्माता: शिक्षक – पुष्पा प्रसादराष्ट्र निर्माता: शिक्षक – पुष्पा प्रसाद
एक शिक्षक अपनी पूरी जिंदगी बच्चों के साथ बिताते हैं। खुद सड़क की तरह एक जगह रखते है पर विद्यार्थी[...]
बेटी की विनती – दिव्या कुमारीबेटी की विनती – दिव्या कुमारी
पापा खूब पढ़ाओ, आगे मुझे बढ़ाओ। शिक्षा का दीप जलाकर, पापा आप इतराओ।। पढ़ा-लिखा पैरों पर अपने, खड़ा मुझे कराओ।[...]
धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “धरा के आभूषण- मीरा सिंह “मीरा “
दादी माँ हमको समझाई क्यों करते वृक्षों का पूजन ? वृक्ष सभी होते हितकारी ये धरती के हैं आभूषण।। ये[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
सिर घुँघराले लट, तन पीतांबर पट, बहुत है नटखट, साँवरा साँवरिया। मंत्र मुक्त होता कवि, जाता बलिहारी रवि, मन को[...]
एक शिक्षक- पुष्पा प्रसादएक शिक्षक- पुष्पा प्रसाद
एक शिक्षक अपनी पूरी जिंदगी बच्चो के साथ बिताते हैं। खुद सड़क की तरह एक जगह रखते है पर विद्यार्थी[...]
छंद: गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’छंद: गीतिका – देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
बच्चों को सिखलाना होगा। सही मार्ग ले जाना होगा।। बच्चे तो हैं मन के सच्चे, यही कर्म दुहराना होगा। होते[...]
