रघुवर के बाल -रूप – रत्ना प्रिया

सौम्य ,शांत रघुवर के, बाल – रूप अनूप हैं | स्नेहसिक्त आचरण में जगन्नाथ स्वरूप हैं || अयोध्या की पुण्यभूमि में, सूर्यवंशी कुल में, खेलें हैं राम पावन, अवध की…

हिन्दी राष्ट्र की भाषा है – रत्ना प्रिया

हिन्दी को नित पढ़ने की, पढ़ाने की अभिलाषा है | गर्व है हम भारतीयों को, हिन्दी राष्ट्र की भाषा है || उड़े गगन में दूर तलक, जमीं हमेशा याद रहे,…

रक्षा-बंधन – रत्ना प्रिया

रेशम की डोरी में गुंफित, भाई-बहन का प्यार | श्रावण लेकर आया पावन, राखी का त्यौहार || नारी माँ, भगिनी, पुत्री है, संस्कृति का श्रृंगार है, शील, क्षमा, ममता करूणा…