उम्मीदों के नवदीप जलाएँ-अर्चना गुप्ता

उम्मीदों के नवदीप जलाएँ उर आच्छादित ईर्ष्या-क्रोध-अहम चाहकर भी मिटा ना पाए ये हम घृणा, द्वेष और कलुषित भाव संग भर गया अंतस तक तिमिर सघन बुझे-बुझे से हैं जो…

प्रेरणा दीप-दिलीप कुमार गुप्ता

प्रेरणा दीप मन कर्म वचन की मलिनता से बाहर सद्भाव सत्कर्म सदचिंतन नव प्रभात बिखराना है प्रेरणा दीप बन जलना है । पुण्य का कुछ पता नही अगणित पाप किया…

समर्पण-अशोक कुमार

समर्पण चाह नहीं कष्ट समर्पित, यही अर्पण हमारा। मैं निज काम आऊँ, दीन दुखियों एवं बेसहारा।। अबला को भी सम्मान समर्पित, पुत्र पुत्री में भेद न जाने। जग में समानता…

संघर्ष-भवानंद सिंह

संघर्ष डटे रहो संघर्ष के मैदान में तुम, चाहे पथ में बाधा अनेक हो। एक जूनून पैदा कर कर मुकाबला अपनी नाकामी से। क्यों नाकाम हुए इस पर विचार करो,…

तटस्थता-अर्चना गुप्ता

तटस्थता  सभ्यता के इस नए दौर में वो बेबाक़पन,  अपनों संग ठहाके और  अल्हड़पन जाने कहाँ हो गए गुम ….. जिंदगी की धूप-छाँव में तपिश को झेलते झेलते मनुष्य का…