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चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता

RAMPAL SINGH ANJAN

RAMPAL SINGH ANJAN

चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
छंद विधाता

यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को।
कटीली झाड़ियों में से, निकाले थे कभी मग को।।
अभावों से सदा लड़कर, किए संघर्ष जीवन में।
सदा निस्वार्थ होकर ही, खिलाए फूल निर्जन में।।

पुराने पेड़ हैं मेरे,मिली हैं अब तलक छाया।
करें स्वागत इन्हें कैसे, नहीं हूॅं हार मैं लाया।।
दिए सामर्थ्य भर मैंने, उन्हें स्वीकार कर लेंगे।
भरोसे में सदा रखकर, शुभंकर प्यार भर देंगे।।

पचासों साल गुजरे हैं, पता अभिलेख से पाया।
खड़े पीछे पितर मेरे, नहीं दिखती कहीं काया।।
उपस्थित हैं घड़ी शुभ में, लिए आशीष हैं भरकर।
करेंगे धन्य मुझको वे, सही दो शब्द शुभ कहकर।।

अभी कुछ लोग जिंदा है, विवशता में नहीं आए।
खबर उन तक गई है जब, वहीं से फूल बरसाए।।
चलो इतिहास कहता है, सफर से मिल रहा है सुख।
प्रकट कल्याणकारी माॅं, मिटाती ही रही है दुख।।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
प्रभारी प्रधानाध्यापक मध्य विद्यालय दरवेभदौर

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