धरती से नाता टूटा है – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ शुभ दर्शन केवल कागज पर, धरती से नाता टूटा है।[...]
Tag: ANJAN
हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजानहरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान
हरिगीतिका छंद – रामपाल प्रसादसिंह अनजान सिद्धिदात्री आकीर्ण तेरी सिद्धियों से, जब चराचर था दुखी। शिव ने किया मनुहार तुझसे,[...]
ब्रह्मचारिणी रूप – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ब्रह्मचारिणी रूप – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
ब्रह्मचारिणी रूप – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ शिखर हिमालय से भी ऊँचा, माता तुमको पाऊँ मैं। दिव्य लोक के सिंहासन[...]
खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजानखो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान
खो रही है अस्मिता को – रामपाल प्रसादसिंह अनजान है गिरी दीवार भारी, टूटता आधार से। रो रही सीता हमारी,[...]
हाय किस्मत रेत-की – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’हाय किस्मत रेत-की – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
हाय किस्मत रेत-की – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ भाद्रपद की अष्टमी तिथि, पक्ष काला था भला। रात आधी भवन कारा,[...]
तितली का छोटा शुभ बचपन – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानतितली का छोटा शुभ बचपन – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
तितली का छोटा शुभ बचपन – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान छोटा जीवन व्यर्थ नहीं है। हमसे अच्छा अर्थ कहीं है।।[...]
अनंग शेखर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ अनंग शेखर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
अनंग शेखर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ अशोक हैं सदैव ही न जिंदगी बड़ी मिली न पंख हैं बड़े-बड़े,[...]
रक्षाबंधन – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’रक्षाबंधन – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
रक्षाबंधन – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ प्रश्नोत्तर जो मिला ढूँढ़कर, पथ प्रशस्त करता है। दिवस पूर्णिमा के धागे में, शक्ति[...]
कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजानकलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
कलाधर छंद – रामपाल प्रसाद सिंह अनजान सुधीर छोड़ते निशान हैं। भारतीय लोग हैं विचारवान पुण्यवान, देश में यहाॅं-वहाॅं नई-नई[...]
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाताचित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता
चित्राधारित सृजन करता मैं रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’ छंद विधाता यहाॅं कुछ लोग हैं दिखते, सुवासित कर रहे जग को।[...]
