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कविता : – बसंत का आगमन – आशीष अम्बर

ashish amber

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कविता : – बसंत का आगमन – आशीष अम्बर

गीत हजारों लिखे गये सब पड़े पुराने,
देखो आया फिर बसंत नव गीत सुनाने ।

मन के अन्दर जाने कैसी हूक उठी है,
कोई बताएं कोयलियाँ क्यूँ कूक उठी है ।

वृक्षों ने क्यों वस्त्र पुराने त्याग दिए हैं,
नए वस्त्र फिर ऋतु बसंत से माँग लिए हैं।

सरसों के ये खेत बोलते कैसी भाषा,
किसको रहे पुकार जागते से नव अभिलाषा ।

टेसू ने भी रक्त – वर्ण आमंत्रण भेजा,
आ मनुष्य आ, ले अमूल्य संपदा ले जा ।

आम्र वृक्ष में नव ऋतु का है बौर आ रहा ,
हमें बताने देखो कोई भोर आ रहा ।

नव – उमंग , मकरंद भोग निर्द्वन्द्व हो रहा,
अंतरंग में जाने क्यों एक द्वन्द्व हो रहा ।

आया बसंत मधुर राग लिए,
मन में प्रेम की धारा अनुराग लिए ।

आशीष अम्बर
( विशिष्ट शिक्षक)
उत्क्रमित मध्य विद्यालय धनुषी
प्रखंड – केवटी
जिला – दरभंगा
बिहार

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