Site icon पद्यपंकज

रक्षाबंधन – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

RAMPAL SINGH ANJAN

RAMPAL SINGH ANJAN

रक्षाबंधन – रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’

प्रश्नोत्तर जो मिला ढूँढ़कर, पथ प्रशस्त करता है।
दिवस पूर्णिमा के धागे में, शक्ति कौन भरता है?
भाई से हो दूर बहन जब, प्रेम प्रबल बहता है।।

कथा सुनो सतयुग के भाई।
इंद्र देव पर आफत आई।।
बार-बार रण हार रहे थे।
पत्नी कथनी टार रहे थे।।
सूत्र तपोबल दे इंद्राणी।
भेजी रण कारण कल्याणी।।
जीत दिलाई बंध कलाई।
तब से रौशन राखी आई।।
सावन वह पूर्णिमा दिवस था, सुरभि भाव गढ़ता है।
भाई से हो दूर बहन जब, प्रेम प्रबल बहता है।।

अन्यायी शिशुपाल निरंतर।
कृष्ण-भ्रात वाचाल निरंतर।।
सौ गाली पूर्व करी भलाई।।
बाद हुआ फिर शीश कटाई।।
तभी काट ली उँगुली अपनी।
पास खड़ी थी द्रोपदी अगनी।।
वस्त्र फाड़ वह कर दी सेवा।
तत्पश्चात मिली फिर मेवा।।
चीरहरण रोकी शुभ राखी, स्नेह धार झरता है।
भाई से हो दूर बहन जब, प्रेम प्रबल बहता है।।

विष्णु बह गए प्रेम ढाल में।
लक्ष्मी माई बुरे हाल में।।
नारद ने गुत्थी सुलझाई।
रेशम धागा बाँध कलाई।।
राजा बलि को आप रिझाओ।
भाई बनकर माँग सुनाओ।।
दानी है वह तुरत झुकेगा।
भवन-भाग्य को स्वयं फुकेगा।।
धागे से यह रिश्ता कायम, सर्वकाल रहता है।
भाई से हो दूर बहन जब, प्रेम प्रबल बहता है।।

रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
सेवानिवृत शिक्षक मध्य विद्यालय दरवेभदौर
ग्राम पोस्ट थाना भदौर पटना बिहार
🙏🙏🙏🙏

0 Likes
Spread the love
Exit mobile version