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Giridhar

आज और अभी की कविता-गिरिधर कुमारआज और अभी की कविता-गिरिधर कुमार

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कविता ! कहाँ हो तुम, उदासियों की परत में दबी, यह कैसी आवाज है तुम्हारी, कराहने की, जैसे कोई सीसा[...]

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