काशक फुलधरती पर जब सरदक पइैन झरिक गेल,हवा हलर-हलर बहि रहल,ओकर संग गामक गाछ-बिरिछ झूमि-झूमि उठल,तखन हरियर खेतक बीच सँसफेद आ नीलल उजासक झलक द’ रहल अछि –काशक फुल। काश,जकर…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- उड़ी वासंती खुशबू -आशीष अम्बर
- जैनेंद्र प्रसाद रवि -बसंत का आगमन
- होली आई -ब्यूटी कुमारी
- कुत्ते पाल रहे-नीतू रानी
- होली का रंग-कार्तिक कुमार
- बसंत का आगमन -जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
- फाग में महका है हर अंग– राम किशोर पाठक
- तुम चलो तो सही-अमृता कुमारी
- देखो आयी होली – आयी होली- श्री रवि कुमार
- फाग-राम किशोर पाठक