योग दिवस योग यह संयोग यह प्रकृति का मेल यह मानव और सृष्टि का कोलाहल से विरक्ति का जीवन का[...]
Tag: गिरिधर कुमार
सीखना जैसे जीना-गिरिधर कुमारसीखना जैसे जीना-गिरिधर कुमार
सीखना जीना जैसे सतत अविरल चलते रहना सबक यह पूरा नहीं होता यह रास्ते खत्म नहीं होते कभी यही सौंदर्य अद्वितीयता[...]
टूटती कविता-गिरिधर कुमारटूटती कविता-गिरिधर कुमार
टूटती सी कविता रंग चटखने लगे हैं इसके परेशान है कविता कोलाहल से किसी कोविड से किसी यास से किसी[...]
तूफान के संग-गिरिधर कुमारतूफान के संग-गिरिधर कुमार
तूफान के संग घोर तिमिर में घिरा पथिक ढूंढ़ता है राह कुछ मन के अवसादों की पोटली का बोझ सिर[...]
धुंध के बीच-गिरिधर कुमारधुंध के बीच-गिरिधर कुमार
धुंध के बीच स्याह सा कुछ तैरता हवाओं में कवि की मुस्कराहट से बौखला जाता है अरे मैं कोरोना हूं[...]
कोरोना कविता और कवि-गिरिधर कुमारकोरोना कविता और कवि-गिरिधर कुमार
कोरोना कविता और कवि लिख रहा हूं कविता, झांकता है कोरोना ठीक सामने की खिड़की से… अट्टहास करता है वो[...]
यक्ष प्रश्न-गिरिधर कुमारयक्ष प्रश्न-गिरिधर कुमार
यक्ष प्रश्न पूछे जाते रहे हैं सवाल कभी हमसे तुमसे युधिष्ठिर से परम्परा रही है यह नियति की उत्तर ढूंढ़ना[...]
मेरी कविता-गिरिधर कुमारमेरी कविता-गिरिधर कुमार
मेरी कविता मेरी कविता मत हो उदास सोच भी नहीं सकता बिना तुम्हारे कुछ भी… क्या हुआ जो स्याह सी[...]
और फिर कोरोना-गिरिधर कुमार और फिर कोरोना-गिरिधर कुमार
और फिर कोरोना यह क्या कसौटियां खत्म नहीं होती! कितनी बार कितनी परीक्षाएं कितनी उदासियां कौन सी सीमायें हैं इसकी[...]
वह शिक्षक हैं-गिरिधर कुमारवह शिक्षक हैं-गिरिधर कुमार
वह शिक्षक हैं बच्चे, स्कूल कक्षा, कोलाहल अपेक्षाएं अपरिमित सीमाएं और वह शांत है, सजग है, सुदृढ़ है वह शिक्षक[...]
