गुरु वन्दना हम हैं कोरे कागज़-सा, आप कलमकार हो गुरुवर। हम तो लिखते गीत हैं, आप सजाते सुर- ताल हो गुरुवर।। हम तो हैं नौसिखिये परिदें, लड़खड़ाते बार- बार हैं…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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