(मनहरण घनाक्षरी छंद में) भाग-१सभी लोग खाते अन्न,एक जैसा होता तन,एक ही तो जल पीते, हिंदू मुसलमां हैं। सभी स्वांस[...]
Tag: छंद
रघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजानरघुनंदन का है शिकार- रामपाल प्रसाद सिंह अनजान
पद्धरी छंदसम -मात्रिक छंद, 16 मात्राएँआरंभ द्विकल से,पदांत Slअनिवार्य रघुनंदन का है शिकार। हर दिशा निशा लो गईं जाग।सबके होंठों[...]
शीत-एस.के.पूनमशीत-एस.के.पूनम
छंद:-मनहरण घनाक्षरी “शीत” सघन है काली रात,रौशनी है थोड़ी-थोड़ी, बंद हुआ घर-द्वार,जाड़े का आलम है। सूर्य ढ़का तुहिन से,घूप थोड़ा[...]
