सुर संस्कृत में छठ-महिमा, सब मुक्त कंठ से गाते हैं। तब सविता के प्रखर प्राण को, आत्मसात् कर पाते हैं।। शुचि, आहार-विहार नीति का, पालन इसमें होता है, फिर…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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