भिन्न-भिन्न जाति, सम्प्रदाय,भिन्न-भिन्न वर्ण और समुदाय,भाषा, राज्य, प्रांत और वतन,भिन्नता सबमें, पर है एक धरम,भिन्न-भिन्न भले सबकुछ, सब असमान,पर एक ही मातृभूमि सबका जन्म-स्थान,वाटिका में भिन्न-भिन्न सा फल-फूल लगे हों,तो…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- हरि वामन बन आए-राम किशोर पाठक
- मानवता जो जीवित मन में-राम किशोर पाठक
- चैत्र पावन मास है-राम किशोर पाठक
- परीक्षा-नैना कुमारी
- वामन अवतार- राम किशोर पाठक
- अहिल्याबाई होल्कर-राम किशोर पाठक
- कृपा करो प्रदान माँ-राम किशोर पाठक
- अंग-अंग प्रेम रंग-राम किशोर पाठक
- गीता का संदेश -गिरीन्द्र मोहन झा
- कैसे आए शांति -रामकिशोर पाठक