भिन्न-भिन्न जाति, सम्प्रदाय,भिन्न-भिन्न वर्ण और समुदाय,भाषा, राज्य, प्रांत और वतन,भिन्नता सबमें, पर है एक धरम,भिन्न-भिन्न भले सबकुछ, सब असमान,पर एक ही मातृभूमि सबका जन्म-स्थान,वाटिका में भिन्न-भिन्न सा फल-फूल लगे हों,तो…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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