Tag: जिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठक

Ram Kishore Pathak

जिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठकजिए जा रहा हूॅं- गजल  राम किशोर पाठक

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  १२२-१२२-१२२-१२२ उदासी छुपाकर जिए जा रहा हूँ। तभी तो लबों को सिए जा रहा हूँ।। निगाहें जिन्हें ढूँढती है[...]

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