तेरी ही तो अक्स हूँ माँ जननी, जीवनदायिनी माँ धैर्य धरा सी, अटल पर्वत सी सामर्थ सागर सा, तुझ में, माँ सृजन, सहन, क्षमा, दया करुणा, ममता, त्याग की प्रतिमूर्ति,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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