प्रभात हम प्रभात की दिव्य किरण बन जग को राह दिखाएँगे। वसुधा कलियाँ नई खिलाकर महक सदा बिखराएँगे।। तिमिर सदा[...]
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वसुंधरा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’वसुंधरा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
वसुंधरा वसुंधरा सदा पावन बने बहे हृदय ऐसा विचार। हरी-भरी नित इसे बनाकर करें हम जीवन साकार।। इस धरा पर[...]
जन्मभूमि-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’जन्मभूमि-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
जन्मभूमि जन्मभूमि की पावन स्मृति खत्म कभी मत होने दें। नील गगन से देख विहग नीड़ कभी न खोने दें।।[...]
नारी-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’नारी-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
नारी नारी लक्ष्मी रूप है, जाने सकल जहान। अन्तर्मन के भाव में, बसते हैं भगवान।। नारी जीवन सार है, बिन[...]
निराला बिहार-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’निराला बिहार-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
निराला बिहार सदा गर्व से कहता हूँ मैं, भू बिहार की प्यारी है। सकल देश सारी दुनिया में, अद्भुत शान[...]
प्रवेशोत्सव नारा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रवेशोत्सव नारा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रवेशोत्सव नारा उत्सव का यह दिन आया है, बच्चों का मन भाया है। बातें प्रवेश की आई हैं, नूतन खुशियाँ[...]
प्रवेश उत्सव-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रवेश उत्सव-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रवेश उत्सव प्रवेश उत्सव आ गया, बच्चे खुश हैं आज। चहकी है किलकारियाँ, देख बिरंगी साज।। मन में नई उमंग[...]
अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’अभिलाषा-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
अभिलाषा मेरी यह तो अभिलाषा है उर को पावन नित बनाऊँ। जन-जन शिक्षा अलख जगाकर मन को सुघड़ कार्य लगाऊँ।।[...]
प्रेम से जीना सीखें-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’प्रेम से जीना सीखें-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
प्रेम से जीना सीखें सदा प्रेम से जीना सीखें प्रेम ही जीवन सार है। अगर प्रेम से नहीं रहोगे जीवन[...]
माँ-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’माँ-देव कांत मिश्र ‘दिव्य’
माँ माँ ही जग में गुरु प्रथम, देती पहला ज्ञान। शीश झुकायें नित चरण, करें सदा सम्मान।। महिमा माँ की[...]
