श्याम समवर्णिक छंद नमन तुम्हें है विधाता।सबल हमें जो बनाता।।अगर तुम्हें रास आता।सहज बने सर्व ज्ञाता।। हम-सब अज्ञान पाले।मगन सभी ज्ञान वाले।।तुम करुणा दान दे दो।अजय बने मान दे दो।।…
SHARE WITH US
Share Your Story on
स्वरचित कविता का प्रकाशन
Recent Post
- अश्रु आंखों में लिए-रामपाल प्रसाद सिंह ‘अनजान’
- कहे ऋतुराज अपनों से-एस.के.पूनम
- बाल शोषण-राम किशोर पाठक
- अपना लक्ष्य-राम किशोर पाठक
- आमंत्रण पुष्प ब्यूटी कुमारी
- तीसवां दिन जनवरी के रामपाल प्रसाद सिंह
- युवा संकल्प कार्तिक कुमार
- सूर्य रश्मियाँ रामकिशोर पाठक
- स्वतंत्रता की चिंगारी जैनेंद्र प्रसाद
- छा गया मधुमास- रामकिशोर पाठक