मत बाँधों मेरे पँखों को,मुझे उन्मुक्त गगन में उड़ने दो।अभी जरा बचपन है बाकी,मदमस्त पवन सी बहने दो। अभी उमर चौदह की केवल,अभी मुझे पढ़ना है।अभी तो चलना सीखा मैंने,अभी…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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