पंछी कौआ मामा बैठ छतों पर, कांव-कांव कर रहे। बच्चे पूछते हे मामा, अतिथि मेरे घर आ रहें।। कोयल बैठी[...]
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पंछी-अशोक कुमारपंछी-अशोक कुमार
पंछी हम पंछी स्वतंत्र रूप में, बंद पिंजरे में न रह पाएंगे। कभी चहकना कभी फुदकना, गुलामी की दास्तां स्वीकार[...]
पंछी-लवली वर्मापंछी-लवली वर्मा
पंछी पंछी होते अत्यंत सुंदर, रंग-बिरंगे और मनमोहक। सम्मोहित करते सदैव हमें, इनके सारे संदर्भ रोचक।। रंग-बिरंगे इनके पंख,[...]
