Tag: पानी

Girindra Mohan Jha

पानी – गिरींद्र मोहन झापानी – गिरींद्र मोहन झा

0 Comments 9:15 pm

पानी तू रंगहीन होती, फिर भी तेरे रंग अनेक,श्रेष्ठ विलायक बनकर तू कितनों को करती एक,आंखों का पानी, हो सबके[...]

और पढ़ेंऔर पढ़ें