प्रकृति का श्रृंगार बसंत बह रही है वासंती बयार भिनी-भिनी खुशबू बिखेरती, चले पवन हर डार-डार हिय से करूँ इसका आभार। नव पल्लव लग जाते हैं वृक्ष और लताओं में,…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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