कोरोना योद्धा छोड़ के अपना घर द्वार छोड़ दिया हूँ मैं परिवार लोगो की सेवा करने को हर पल मैं[...]
Tag: प्रभात रमण
गंगा धारा-प्रभात रमणगंगा धारा-प्रभात रमण
गंगा धारा ये जीवन एक सरिता है गतिमान है हरपल बिता हुआ नहीं देखते बस देखते हैं कल बचपन खेल[...]
मतदान-प्रभात रमणमतदान-प्रभात रमण
मतदान आया समय फिर दान का स्वागत करो मतदान का । विकास का परिधान दो अपना मतदान दो । अभी[...]
इंसान-प्रभात रमणइंसान-प्रभात रमण
इंसान अब मैं ही मैं हो गया है हम शब्द जाने कहाँ खो गया है । पुरखों का नाम[...]
गाँधी-प्रभात रमणगाँधी-प्रभात रमण
गाँधी गाँधी भारत की भावना का सार है । गाँधी सभी धर्म जाती का परिवार है । गाँधी सभी परम्पराओं[...]
हर जीव में-प्रभात रमणहर जीव में-प्रभात रमण
हर जीव में कितनी भी पूजा करो तुम मिट्टी और पाषाण का । पर मानो या न मानो हर जीव[...]
माँ-प्रभात रमणमाँ-प्रभात रमण
माँ आँख खुली तो तुमको पाया रेंग रेंगकर खड़ा हुआ । तेरी ममता की छाया में न जाने कब बड़ा[...]
मातृभाषा हिंदी-प्रभात रमणमातृभाषा हिंदी-प्रभात रमण
मातृभाषा हिंदी हिंदी हमारी आन बान और शान है । हिंदी ही हमारी पहचान है । हिंदी से ही हिंदुस्तान[...]
मैं किसान हूँ-प्रभात रमणमैं किसान हूँ-प्रभात रमण
मैं किसान हूँ हूँ दीन, हीन, गरीब, मगर मैं सबसे बड़ा अमीर हूँ । ये जमीन मेरी है, ये आसमाँ[...]
शब्द और कवि-प्रभात रमणशब्द और कवि-प्रभात रमण
शब्द और कवि कविता के शब्द नहीं वह तो उसका एक बेटा है कुछ नन्हा सा कुछ बड़ा हुआ कुछ[...]
