बाल मन – ज्योत्सना वर्द्धन बाल मन है कितना कोमल सपनों में रहता है उलझा नन्हें ख्वाब बुनती है निंदिया बाल मन है कितना कोमल समय से सब काम…
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बाल मन-अर्चना गुप्ता
बाल मन बाल मन होते कोमल निश्छल मुस्काते नैन ज्यों कुसुम कमल मन के होते स्वच्छ-भोले-सच्चे ज्यों व्याप्त श्वेत हिमगिरि धवल मुखमंडल पर अति मधुर मुस्कान उनके हिय विराजें सदा…