राष्ट्रीय पक्षी दिवस – मनहरण घनाक्षरी – राम किशोर पाठक आया यह दिन खास, करना है अहसास, जनवरी पाँच आज,[...]
Tag: मनहरण घनाक्षरी
मनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठकमनहरण घनाक्षरी- रामकिशोर पाठक
अंडाकार पथ पर, ग्रह लगाते चक्कर, सूर्य रहता केन्द्र में, परिक्रमा मानिए। सूर्य की पृथ्वी चंद्रमा, करे सदा परिक्रमा, तीनों[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
घटाएँ गरजती हैं, बिजली चमकती हैं, सारा जग दिखता है, दूधिया प्रकाश में। रात में अंधेरा होता, बादलों का डेरा[...]
मनहरण घनाक्षरी- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’मनहरण घनाक्षरी- देवकांत मिश्र ‘दिव्य’
निपुण का भाव भर, पहुँच प्रदान कर, बुनियादी ज्ञान से ही, बच्चों को जगाइए। संख्या की समझ लाएँ, प्रतिपुष्टि गुण[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
दिन भर काम करे, कभी न आराम करे, अकेली सुबह शाम, भोजन बनाती हो। हमें विद्यालय भेज, कपड़े बर्तन धोती,[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह
उपदेश देकर जो, जिंदगी सवार लेते, बेचकर निज कर्म, सहज बनाते हैं। दुनिया को कहे फिर, ,बेकार हैं मोती हीरे,[...]
मनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंहमनहरण घनाक्षरी- रामपाल प्रसाद सिंह
भाद्रपद शुक्लपक्ष, धन्य हे सुलक्ष्य लक्ष, वक्रतुंड महाकाय, चरण पखारते। कोमल- कोमल दूर्वा, मोदकम मोतीचूर्वा, मूषक वाहन बीच, लाल ही[...]
मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम
भारत के तिरंगे में, शोभित हैं तीनों रंग, फहराए हवा संग, झुका आसमान है। जल,थल,नभ सेना, तत्पर रक्षा में सदा,[...]
मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’मनहरण घनाक्षरी- जैनेन्द्र प्रसाद ‘रवि’
पावन है देवघर, भोलेनाथ की नगरी, आज सारी दुनिया में, बना सिरमौर है। किसानों में खुशहाली, खेतों बीच हरियाली, पावन[...]
मनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनममनहरण घनाक्षरी- एस. के. पूनम
रंगभूमि कर्मभूमि, गोदान है वरदान, निर्मला मंगलसूत्र, दिया पहचान है। ईदगाह बूढ़ीकाकी, याद है पूस की रात, लिखे मानसरोवर, पढ़ना[...]
