मनहरण घनाक्षरी प्रेमियों के होठों पर ( लता) साम्राज्ञी सुरों की लता, कहाँ गयीं नहीं पता, प्रेमियों के होठों पर, वो गुनगुनाती है । दुनिया है आज रोई, दीदी चिर…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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