वर्षा तपी हुई थी धरती, गर्मी के प्रकोप से चुपके-चुपके एक बूँद गिरी बादलों के ओट से पंछी चहके, धरती महके, सौंधी-सौंधी खुशबू लाई वर्षा आई, वर्षा आई वर्षा है…
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स्वरचित कविता का प्रकाशन
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